जिले के बारे में

चन्देरी रावंश के राजपूत राजा वीर चन्द ने 697 ई0 में स्थापित कहलूर रियासत के अन्मि राजा राजा आनन्द चन्द थे। कहलू नामक गुर्जर की बकरी एक शिला पर थी जिस पर बाघ तीन बार झपटा परन्तु बकरी द्वारा सींगों से पीछे धकेल दिया गया। कहलू गुर्जर की जुबानी सुने वृतान्त के आधार पर राजा वीरचन्द द्वारा वहां पर एक किले का निर्माण किया गया जिसका नामकरण कहलू गुर्जर के आधार पर कोट कहलूर किया गया तथा रियासत कहलूर नाम से प्रसिद्ध हुई, बिलासपुर कस्बा 1663 में स्थापित हुआ जिस ऋषि व्यास के, व्यास गुफा में उनेक निवास के आधार पर नाम से नामकरण किया गया । बिलासपुर भारत की आजादी के पश्चात एक अलग राज्य के रूप में स्थापित रहा, जिसे कि 1 जुलाई, 1954 को भारतीय संसद के एक एक्ट द्वारा हिमाचल का पांचवां ज़िला बनाया गया । सिख गुरू श्री तेग बहादुर सिंह जी ने बिलासपुर का भ्रमण किया तथा नानकी गांव की स्थापना की। प्रसिद्ध साहित्यकार राहुल सांस्कृत्यायन ने 1957 में बिलासपुर का भ्रमण किया। श्री नैना देवी मन्दिर ,बडोल देवी मन्दिर, पीर भ्याणु मन्दिर, सोहणी देवी का मन्दिर, मारकण्ड मन्दिर, लक्ष्मीनारायण मन्दिर प्रसिद्ध हैं। नलवाड़ी मेला, चैत्र मेला,शाहतलाई गुग्गा मेला नवरात्र मेला नैना देवी प्रसिद्ध मेले हैं। लूहणू मैदान में भव्य खेल मैदान, क्रिकेट स्टेडियम, जल क्रीड़ाएं अदि विभिन्न खेल आयोजनों के स्थल हैं। विक्टोरिया क्रास विजेता श्री भण्डारी राम, परमवीर चक्र विजेता श्री संजय कुमार, फिल्म अभिनेत्री यामी गौतम, गम्भरी देवी, घट नर्तकी फूलां चन्देल, किसान हरिमन शर्मा, केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्री श्री जगतप्रकाश नड्डा ज़िले के प्रमुख व्यक्ति हैं।